INDIA चाह कर भी नही कर सकता WAHAN (CHINA) में फसे PAKISTANI STUDENTS की मदद… ये है कारण?

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असंवेदनशील कर सकते हैं कोल्ड हार्टेड सेडिस्ट कह सकते हैं

किंतु मैं बिल्कुल भी इस पक्ष में नहीं हूं कि भारत चीन से पाकिस्तानी छात्रों को रेस्क्यू करे,

भले अधिकांश लोग भूल चुके हो किंतु मुझे याद है की वर्ष 2018 में टर्की एयरलाइंस के विमान से यात्रा कर रहे

एक भारतीय पैसेंजर की तबीयत खराब होने पर उस विमान ने लाहौर में इमरजेंसी लैंडिंग करी थी

जिससे कि उस यात्री को ट्रीटमेंट दिया जा सके और उसके प्राण बचाए जा सकें,

परंतु यह पता चलने पर कि ट्रीटमेंट भारतीय पैसेंजर को देना है,

पाकिस्तान ने उस भारतीय पैसेंजर को ट्रीटमेंट देने से मना कर दिया था।

पाकिस्तान और चीन मित्र हैं और रणनीतिक साझेदारी का दम भरते हैं,

कोरोना वायरस की पहचान कैसे की जाती है?

स्वयं सम्भाल ले अपने प्रिय छात्रों को,

और सोचिये पाकिस्तानी वायुसेना यदि भारतीय एयर स्पेस में आकर एरियल रेड अंजाम देने का प्रयास कर सकती है

तो अपने नागरिकों को भी चीन से निकाल सकती है।


दूसरी बात यह की अभी तक पाकिस्तान ने भारत से

अपने छात्रों को बचाने की कोई अधिकारिक अपील नहीं की है

तो भारत भला क्यों व्यर्थ में अपने मन से आगे बढ़े ?


याद रखिए जब पाकिस्तान के स्कूल में

आतंकवादियों ने हमला किया था तो रोते हुए बच्चों की मां ने कहा था कि इन्हें क्यों मार दिया,

यह तो काफिर नहीं बल्कि मुसलमान थे,

यह एक आम पाकिस्तानी के अंदर भरी बहुजन के प्रति घृणा का प्रत्यक्ष उदाहरण था।


हम भारतीयों के अंदर यह ज्यादा अच्छा बनने की

भावना व् बड़ा हृदय दिखाने की प्रवत्ति ही हमेशा से हमें नुकसान पहुंचाती आई है,

सिंध के राजा दाहिर ने मोहम्मद के वंशजों को शरण दी थी

और फलस्वरूप मोमिनों की फौज ने उनका पूरा राज तहस नहस कर दिया था,

राजा दाहिर उनके पुरे परिवार की हत्या कर दी गयी

और उनकी पत्नी और दोनों बेटियों को सामूहिक बलात्कार का शिकार बनाकर

उन्हें सिंध के रास्तों पर निर्वस्त्र परेड करवाया गया था।


याद रखियेगा पृथ्वीराज चौहान ने 16 बार आक्रमणकारी मोहम्मद गौरी को अच्छाई दिखाते हुए क्षमा कर वापस जाने दिया था,

और 17वीं बार में उसने पृथ्वीराज चौहान को पराजित किया उनकी ऑंखें फोड़ीं उन्हें गुलाम बनाया और और संयोगिता को अपनी यौन दासी बना लिया था।


याद रखिए हम आज भी पाकिस्तान को पोलियो ड्रॉप्स, सैकड़ों जीवन रक्षक दवाएं और मेडिकल इक्विपमेंट्स सस्ती दरों पर देते हैं,

पाकिस्तानियों की जान बचाने के लिए उन्हें मेडिकल वीजा जारी करते हैं,

उनका इलाज अपने अस्पतालों में करवाते हैं, इंडस वाटर ट्रीटी के अंतर्गत भारत 70% जल पाकिस्तान को देता है

और उसका बदला पाकिस्तान भारत में आतंकवादी भेज निर्दोष भारतीयों की हत्याएं करवाकर चुकाता है,


याद करिए भारत में आलोचना झेलकर इन्हीं पाकिस्तानियों को मेडिकल वीज़ा जारी करने वाली सुषमा स्वराज की मृत्यु पर इन्ही पाकिस्तानियों ने सोशल मीडिया पर उत्सव मनाया था

अमर्यादित और अशोभनीय टिप्पणियां तक की थी,


इतिहास यही सिखाता है की अनावश्यक सहृदयता आत्मघाती होती है,

कल्पना कीजिए कि बिना पाकिस्तान की अधिकारिक रिक्वेस्ट के भारत उन पाकिस्तानी छात्रों को रेस्क्यू कर भारत सुरक्षित ले भी आता है टबक्या गारंटी है

कि पाकिस्तान उन्हें एक्सेप्ट कर लेगा ?

और फिर यदि उनमें से कोई कोरोना वायरस से संक्रमित हुआ और उसके द्वारा किसी भारतीय मे संक्रमण फैला तो उत्तरदाई कौन होगा ?


अतः भावनाओं को संभाल कर रखिए, और याद रखिए कि कभी कभी किसी विषय पर कोई कार्यवाही न लेना ही सर्वश्रेष्ठ निर्णय होता है।

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